- दोनों गवाहियाँ एक-दूसरे के साथ अनिवार्य रूप से जुड़ी हुई हैं। इनमें से एक को छोड़ दिया जाए, तो दूसरी सही नहीं होगी। इसी लिए दोनों को एक स्तंभ बनाया गया है।
- यह दोनों गवाहियाँ दीन की बुनियाद हैं। इनके बिना कोई कथन अथवा कार्य ग्रहण योग्य नहीं है।
व्याख्या
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